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वित्त मंत्रालय का SEBI को AT1 Bonds पर जारी सर्कुलर वापस लेने का निर्देश, जानें क्या है पूरा मामला

12 मार्च 2021, 02:25 PM

वित्त मंत्रालय का SEBI को AT1 Bonds पर जारी सर्कुलर वापस लेने का निर्देश, जानें क्या है पूरा मामला
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने 10 मार्च, 2021 को एक सर्कुलर जारी कर एडिशनल टियर 1 (AT1) बॉन्ड्स जिसे पर्पेचुअल बॉन्ड भी कहते हैं, इसकी मैच्योरिटी 100 साल करने का फैसला किया था, इससे बैंकों और म्यूचुअल फंड्स के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया था। यह नियम 1 अप्रैल, 2021 से लागू होना था। लेकिन अब वित्त मंत्रालय ने SEBI को निर्देश दिया है कि वह इस सर्कुलर को वापस ले। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने SEBI को एक मेमोरेंडम भेजकर इस फैसले को वापस लेने को कहा है।

AT1 बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 100 साल करने के साथ ही SEBI ने म्यूचुअल फंड्स (Mutual funds) द्वारा स्पेशल फीचर्स वाले डेट (Debt) में निवेश की सीमा फिक्स कर दी है। हालांकि, इस नए नियम से वित्त मंत्रालय को आपत्ति नहीं है। SEBI के सर्कुलर के मुताबिक, Mutual funds अब अपने ऐसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% ही स्पेशल फीचर्स वाले वैसे डेट (Debt) में निवेश कर सकेंगे जो इक्विटी में कनवर्ट हो सकते हैं। सेबी ने कहा कि इसमें एडिशनल टियर 1 (AT1) और एडिशनल टियर 2 (AT2) बॉन्ड शामिल होंगे। SEBI के सर्कुलर के मुताबिक, सिंगर इश्यूअर (single issuer) के डेट में म्यूचुअल फंड अपने ऐसेट का 5% से अधिक निवेश नहीं कर सकेंगे।

AT1 बॉन्ड्स की मैच्योरिटी 100 साल करने से म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री सकते में आ गया था, क्योंकि इन बॉन्ड्स के रीवैल्यूएशन से निवेशकों को घाटा होता। इसी वजह से म्यूचुअल फंड्स बॉडी AMFI ने SEBI के इस फैसले का विरोध किया था। AMFI ने कहा कि बैंकों और कैपिटल मार्केट के लिए यह नियम घातक है, इससे बैंकों को केपिटल जुटाने में परेशानी होगी और पूंजी के लिए बैंकों को सरकार पर निर्भर होना होगा। इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए। AMFI ने कहा कि मैच्योरिटी को 100 साल करने से इंटरेस्ट रेट्स में मामूली बदलाव से इन बॉन्ड्स में निवेश करने वालों को बड़ा घाटा होगा और इस घाटे के डर से निवेशक इसमें निवेश नहीं करेंगे। 

क्या है AT1 बॉन्ड

आपको बता दें कि AT1 और AT2 बॉन्ड्स को perpetual भी कहा जाता है, क्योंकि इनकी कोई फिक्स मैच्योरिटी डेट नहीं होती है। हालांकि, बैंक रेगुलर इंटरवल पर इन्हें repay करते रहते हैं। अगर ऊंचे NPA के कारण बैंक के कैपिटल में गिरावट आती है है तो ये बॉन्ड उस घाटे को सोख लेते हैं। AT1 बॉन्ड को टियर 1 बॉन्ड कहा जाता है। ये बिना एक्सपायरी वाले स्थायी बॉन्ड होते हैं। ये बैंकों की पूंजी की जरूरत पूरा करने में मददगार होते हैं।

AT1 बॉन्ड के लिए RBI रेगुलेटर होता है। इसमें नियमित अंतराल पर तय ब्याज दर का भुगतान किया जाता है। इसमें गैर-स्थायी बॉन्ड से ज्यादा ब्याज दर होती है जहां निवेशकों को मूलधन वापस देना जरूरी नहीं होता है। हालांकि पैसे की जरूरत होने पर धारक इसे बेच सकते हैं। इसमें बॉन्ड जारी करने वाले बैंक को निवेशक वापस नहीं कर सकते हैं लेकिन बैंकों के पास AT1 बॉन्ड को वापस बुलाने का विकल्प होता है।

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