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Global Funds:कहां और कितना करें निवेश, जानिए इनमें निवेश के खास मंत्र

15 फ़रवरी 2021, 09:19 AM

Global Funds:कहां और कितना करें निवेश, जानिए इनमें निवेश के खास मंत्र

वर्तमान बाजार स्थिति में फॉरेन इक्विटी में खरीदारी या विदेशी म्यूचुअल फंडों में निवेश अपने पोर्टफोलियों के डायवर्सिफिकेशन  का बेहतर तरीका हो सकता है। लेकिन इस तरह के निवेश के पहले ये जानना जरूरी है कि कहां और कितना निवेश करें।

International mutual funds को जांचने के दो अहम तरीके हैं। पहले के तहत हम भौगोलिक आधार पर इनकी स्कैनिंग करते हैं। दूसरे के तहत हम सेक्टर के आधार पर इनका विश्लेषण करते हैं। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत की जीडीपी दुनिया की जीडीपी की सिर्फ 3 फीसदी है। इस स्थिति में हमारे पास निवेश के लिए दुनिया का करीब 97 फीसदी अनटैप्ड बाजार है।

पर्सनल फाइनेंस कोच पारितोष शर्मा का कहना है कि विकसित बाजारों के कुछ स्टॉक आपके पोर्टफोलियो को अच्छी मजबूती दे सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि  अगल-अलग देशों के बाजार अगल-अलग व्यवहार करते हैं। जैसे कि 2015 सेंसेक्स के लिए निगेटिव रहा वहीं, यूरोपियन और जापानी बाजार ने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया। 2017 में सेंसेक्स ने 28 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया लेकिन इसी साल चीन के Hang Seng ने इससे भी अच्छा प्रदर्शन किया और 36 फीसदी का जोरदार रिटर्न दिया। लेकिन अक्सर ये देखने को मिला है कि किसी ग्लोबल क्राइसिस की स्थिति में अमेरिका जैसे बाजार उभरते बाजारों की तुलना में कम गिरते हैं।

2000 में टेक बबल के फूटने पर Sensex 21 फीसदी गिरा था जबकि अमेरिका के Dow Jones में सिर्फ 6 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। इसी तरह 2008 में Sensex में 52 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी जबकि अमेरिकी बाजार सिर्फ 34 फीसदी टूटे थे।

इस स्थिति में अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश आपके पोर्टफोलियो को अच्छी तरह से डाइवर्सीफाइ करने में मदद कर सकता है। इसकी वजह ये है कि जब तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी, ग्लोबल रेट हाइक और उभरते बाजारों से FPI की भगदड़ जैसे मैक्रो रिस्क उत्पन्न होते हैं तो विदेशी शेयरों खास कर डॉलर डॉमिनेटेड शेयरों में निवेश करने से आप इन तमाम चुनौतियों से निपटते हुए अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। इस तरह की स्थिति में किसी निवेशक को चाइना और जापान जैसे इमर्जिंग मार्केट इक्विटीज से दूर रहना चाहिए क्योंकि इस तरह की स्थितियों में ये बाजार भारतीय बाजारों की तरह ही व्यवहार करते हैं और आपको यहां निवेश करने से डायवर्सिफिकेशन का फायदा नहीं मिलता।

ज्योग्राफी के आलावा इन फंडों में निवेश का दूसरा मानक सेक्टोरल फैक्टर है। कुछ international funds किसी खास सेक्टर या थीम के शेयरों में निवेश करते है। इनके नाम भी इनके निवेश के सेक्टर या थीम जैसे ही हो सकते हैं जैसे gold funds, real estate funds, agriculture funds। ये फंड  उन निवेशकों के लिए बेहतर होते हैं तो पहले से ही प्लेन वनीला इंटरनेशनल फंडों और घरेलू इक्विटी फंडों में निवेशित होते हैं लेकिन अब कुछ और स्पेसिफिक निवेश करना चाहते हैं।

इसके अलावा यहां आपके निवेश के लिए Funds of Funds भी हैं। ये फंड घेरलू बाजार से फंड इकठ्ठा करके विदेशी फंडों में निवेश करते हैं। इन फंडो का मैनेजर भारत में बैठकर उसी पैरेंट कंपनी के विदेशी फंड में आपके पैसे लगाता है। पारितोष शर्मा का कहना कि इस स्थिति में उन फंडों में पैसा लगाना ज्यादा बेहतर होता है जिसका मैनेजर उसी देश में होता है जहां पैसे लगाए जाते हैं। उसको देश की इकोनॉमी के बारे में बेहतर जानकारी होगी और वह इसके आधार पर ज्यादा बेहतर निर्णय ले पाएगा।

पारितोष शर्मा का कहना कि अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत की जीडीपी दुनिया की जीडीपी की सिर्फ 3 फीसदी है। इस स्थिति में हमारे पास निवेश के लिए दुनिया का करीब 97 फीसदी अनटैप्ड बाजार है। अब ये निवेशक के ऊपर निर्भर करता है कि वह अपने वर्तमान पोर्ट फोलियो के साथ कितना जोखिम ले सकता है और उसकी निवेश अवधि कितनी है।

international funds में पैसे लगा कर आप defense equipment और global e-tailers जैसे ऐसे सेक्टरों में भी निवेश कर सकते हैं जिनमें आप भारत में निवेश नहीं कर सकते। इन फंड में निवेश करके आप Amazon, Apple, Facebook जैसी कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। अगर आप अपने पोर्टफोलियो को अच्छे से डाइवर्सीफाइ करना चाहते हैं तो फिर विदेशी फंडों में निवेश का जोखिम लिया जा सकता है।

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