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चिट फंड के कानून में बदलाव, अब सुरक्षित होगा चिट फंड में निवेश!

21 नवम्बर 2019, 10:22 AM

चिट फंड, एक ऐसा कारोबार जिसके बारे में आम तौर पर समझदार लोग बहुत अच्छी राय नहीं रखते। इसके पीछे वजह ये है कि हाल के दिनों में चिट फंड के नाम पर बड़े-बड़े घोटाले देखने को मिले। पता चला कि कई अलग अलग मामलों में नेता, नौकरशाह और चिट फंड की सांठ-गांठ से लाखों लोगों को चूना लगाया गया। मगर तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि जिन लोगों के पास बैंक और NBFCs की सुविधा नहीं है उनके लिए चिटफंड निवेश और पूंजी की जरूरतों के लिए एक बड़ा स्रोत है। इसलिए सरकार अब चिट फंड के कानून में बड़े बदलाव करने जा रही है। मकसद है ज्यादा पारदर्शिता और ग्राहक की सुरक्षा ताकि ये कारोबार तेजी से फल फूल सके। आज इसी पर चर्चा होगी।

बदलेगा चिट फंड कानून

चिट फंड कानून बदलने के लिए संसद में बिल पेश किया गया है जिसके जरिए चिट फंड कानून, 1982 में बदलाव होगा। अब इसमें व्यक्तिगत निवेश की सीमा बढ़ेगी और ये बढ़कर 3 लाख रुपये होगी। अभी तक ये सीमा 1 लाख रुपये है। अब कंपनियों की निवेश सीमा 18 लाख रुपये होगी जो अभी तक 6 लाख है। चिट फंड में नए नाम भी जोड़े जाएंगे। चिट फंड को fraternity fund या rotating savings and credit institution नाम भी दिया जा सकता है। नए कानून के तहत फंड के फैसले लेने का तरीका भी बदलेगा। अब न्यूनतम 2 सदस्यों की मौजूदगी में ही फैसला लिया जा सकेगा। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी इनकी मीटिंग हो पाएगी। फंड मैनेज करने का कमीशन भी बढ़ेगा। फंड मैनेजर foreman को अब 7 फीसदी कमीशन मिलेगा। पहले foreman का कमीशन 5 फीसदी होता था। अब foreman के अधिकार बढ़ाए जाएंगे साथ राज्य सरकारों को ज्यादा कंट्रोल मिलेगा।

क्या है चिट फंड

- ये भारत में प्रचलित फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है.
 - ये बचत और कर्ज दोनों का स्रोत है.
 - ये दो या अधिक लोगों का साझा फंड होता है.
 - इसमें हर महीने जमा पैसे की नीलामी होती है.
 - सबसे कम बोली वाले को पैसा दिया जाता है.
 - नीलामी में बचत से इसका खर्च चलता है.
 - नीलामी की बचत में सदस्यों का भी हिस्सा होता है.
 - इसमें बारी-बारी हर सदस्य को पैसा मिलता है.
 - राज्य सरकारें फंड का रजिस्ट्रेशन करती हैं.

कैसे-कैसे चिटफंड

- राज्य सरकारों के चिट फंड.
- निजी रजिस्टर्ड चिट फंड.
- गैर रजिस्टर्ड छोटे चिट फंड.

चिट फंड की अच्छी बात

- बचत और कर्ज का लचीला साधन.
 - एक किस्त देकर भी पैसा मिल सकता है.
 - बिना ज्यादा औपचारिकता कर्ज की सुविधा.
 - कर्ज ना लेने वाले सदस्य को अच्छा रिटर्न.
 - पैसा कहां खर्च करेंगे बताना जरूरी नहीं.

चिट फंड की बुरी बात

- तय रिटर्न की कोई गारंटी नहीं.
- रकम डूबने का खतरा ज्यादा.
- फंड चलाने वाला भाग सकता है.
- फंड से कर्ज लेने वाला भाग सकता है.

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