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आवाज़ आंत्रप्रेन्योरः ई-लर्निंग में कारोबार के मौके

14 नवम्बर 2015, 03:40 PM

टेक्नोलॉजी का असर हर क्षेत्र में दिख रहा है चाहे वो बैंकिंग हो रिटेल या फिर शिक्षा। टेक का सहारा लेकर ऐसे कई मॉडल सामने आए हैं जो तेजी से बाजार में जमे जमाए बिजनेस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। ई-लर्निंग भी एक ऐसा ही क्षेत्र है। आवाज़ आंत्रप्रेन्योर में हम आपकी मुलाकात करा रहे हैं दिल्ली की विजआईक्यू से जिसे आप शिक्षा का उबर कह सकते है। ये प्लेटफॉर्म स्टूडेंट्स और टीचर्स को जोड़ता है।

भारत में 4-5 साल पहले ही ई-लर्निंग इस कॉन्सेप्ट की शुरुआत हुई, लेकिन इंटरनेट के बढ़ते दायरे और देश में फैलते ब्रॉडबैंड नेटवर्क ने ऑनलाइन लर्निंग को एक इंडस्ट्री में बदल दिया है। अब क्लासरुम में पढ़ाई के पारंपरिक तरीके को पीछे छोड़ते हुए वर्चुअल एकैडमी बन रही है। कोर्सेरा, एडुमी, इंडियन ट्यूटर विस्टा एजुकेशन में क्रांति लाने वाले कई स्टार्टअप्स हैं। इनके बीच दिल्ली की विजआईक्यू कुछ हटके होने का दावा कर रही है।

2007 में विदेश में ई-लर्निंग का कॉन्सेप्ट बूम में था, और हरमन ने इसका फायदा उठा अमेरिका से विजआईक्यू क्लाउड बेस्ड लर्निंग प्लैटफॉर्म की शुरुआत 2007 में की। विजआईक्यू एक मोबाइल बेस्ड प्लेटफॉर्म है जो अपने ग्राहकों को ऑनलाइन एकैडमी बनाने की सहूलियत देता है।

अमेरिका में शुरुआत के बाद विजआईक्यू का विस्तार भारत में किया इसके अलावा यूरोप, खाड़ी देशों में भी कारोबार फैलाया। बाजार में मौजूदा लर्निंग प्लैटफॉर्म से हटकर विजआईक्यू पर शिक्षक और विद्यार्थी अपनी सहूलियत और पसंद के मुताबिक एक दुसरे का चुनाव कर सकते हैं। 8 साल पहले करीब 30 लाख के स्टार्टअप कैपिटल से हरमन ने कंपनी की शुरुआत की। 2013 कंपनी ने सीरीज बी फंडिंग में प्राइवेट इक्विटी फंड कैजेन से 40 लाख डॉलर जुटाए थे। अभी तक कंपनी कुल 80 लाख डॉलर जुटा चुकी है। लेकिन इस कारोबार को बड़ा बनाने के सफर में फाउंडर को शुरुआती दौर में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

विजआईक्यू शुरू करने के पीछे हरमन का मकसद था अलग-अलग तरह के टीचर्स को एक प्लैटफॉर्म पर लाना। ताकि स्टूडेंट को अगर नए टीचर या अतिरिक्त कोचिंग की जरूरत पड़े तो भी किसी दूसरे प्लैटफॉर्म का ख्याल भी न आए। फिलहाल इस प्लैटफॉर्म पर 4 लाख शिक्षक जुड़े हैं, वहीं दुनियाभर के 40 लाख स्टुडेंट्स विजआईक्यू के वर्चुअल क्लासरूम का फायदा उठा रहे हैं। कस्टमाइज्ड सिलैबस, अपनी सहुलियत, पेस और समय के मुताबिक ट्‌यूशन और मनपसंद शिक्षक चुनने जैसे फीचर्स के चलते स्टुंडेंट्स विजआईक्यू को पसंद करने लगे हैं।

विजआईक्यू के साथ व्यक्तिगत टीचर्स के अलावा इंस्टीट्यूट्स और एकैडमीज भी जुड़ने लगी हैं। हाल ही में कंपनी का आकाश इंस्टीट्यूट से करार हुआ है। जिसके चलते आकाश लाइव ऑनलाइन ट्यूटोरियल शुरू हुआ है। कम समय में इस वर्चुअल क्लासरूम को स्टुडेंट्स का बढ़िया रिस्पांस मिला है। हरमन के मुताबिक 40 फीसदी ट्रैक्शन छोटे शहरों से आ रहा है। इस लर्निंग सिस्टम से सिर्फ स्टुडेंट्स ही नहीं पैरेंट्स भी काफी संतुष्ट हैं।

कंपनी की पहुंच 100 से भी ज्यादा देशों और शहरों में है। आसान पढ़ाई के अलावा इस ई-लर्निंग के किफायती दाम भी कंपनी के कामयाबी में कारगर साबित हुए हैं। विजआईक्यू प्लैटफॉर्म स्टुडेंट्स के लिए फ्री है और टीचर्स के लिए 3 पेमेंट प्लान है, बेसिक प्लान फ्री है। प्रीमियम और एंटरप्राइज प्लान में मल्टीपल एकैडमीज के विकल्प, क्लाउड पर स्टोरेज स्पेस, मोबाइल लर्निंग, कस्टमाइजेशन जैसे फीचर्स शामिल हैं। इनके लिए सालाना फीस अमुमन 600-700 रुपये है।

आमतौर पर भारतीय स्टार्टअप्स का अंतिम लक्ष्य कारोबार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों मे ले जाने का होता है, वहीं विदेश में कामयाब होने के बाद हरमन भारत की 2-3 करोड़ डॉलर के ऑनलाइन एजुकेशन मार्केट में अपने कारोबार को बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं। विजआईक्यू भारतीय बाजार में 25 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ इंडस्ट्री लीडर बनने के मकसद से अपनी स्ट्रैटेजी बना रही है।

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