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आवाज़ अड्डाः अयोध्या विवाद, सुलझ पाएगा मसला!

14 नवम्बर 2017, 08:59 PM

अयोध्या में मंदिर बनेगा कि नहीं! बरसों, बल्कि दशकों पुराना ये सवाल एक बार फिर गर्म है। अब सवाल में एक पेंच आ गया है। सवाल ये है कि क्या अदालत के बाहर ही अयोध्या मामले पर सहमति बन जाएगी? सुप्रीम कोर्ट ने पिछले मार्च में कहा था कि अयोध्या विवाद से जुड़े सभी पक्षों को बातचीत से इस गंभीर मसले का ऐसा हल निकालने की कोशिश करनी चाहिए जिसपर सभी राज़ी हों। हालांकि तब से अब तक इस बारे में कुछ होता हुआ दिखा नहीं, लेकिन अभी अचानक फिर हलचल तेज हो गई है।
आर्ट ऑफ लिविंग के मुखिया रविशंकर ने मध्यस्थता के लिए पहल की है। लेकिन उनकी तरफ से कुछ हो इससे पहले ही शिया वक्फ बोर्ड ने अखाड़ा परिषद से बात भी कर ली और सुलह का फॉर्मूला भी पेश कर दिया है। लेकिन क्या इतना पुराना विवाद इतनी आसानी से सुलझ जाएगा। वो भी तब जब राजनीतिक दलों में भी इस मामले पर गंभीर मतभेद हैं।

श्री श्री रविशंकर अयोध्या विवाद के सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेंगे - रविशंकर की सूची में केंद्र सरकार, यूपी सरकार सबसे ऊपर हैं। हालांकि रविशंकर को किसी ने भी नियुक्त नहीं किया है लेकिन केंद्र और यूपी की बीजेपी सरकारें उनकी पहल का स्वागत कर रहे हैं।

लेकिन कांग्रेस पार्टी रविशंकर की मध्यस्थता को ज्यादा तवज्जो देने के पक्ष में नहीं है। लेकिन रविशंकर अपने अभियान की शुरुआत करें इससे पहले ही उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड ने अखाड़ा परिषद से बातचीत करके सुलह का एक फॉर्मूला तैयार कर लिया है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

शिया वक्फ बोर्ड के मुताबिक राम मंदिर अयोध्या में विवादित जमीन पर ही बनना चाहिए, जबकि अयोध्या और फैजाबाद से बाहर किसी जगह पर मस्जिद बनाई जा सकती है। लेकिन कोर्ट में मामले के पक्षकार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक कोर्ट से बाहर समझौता कोई नहीं चाहता। इसलिए शिया वक्फ बोर्ड को ज्यादा तवज्जो देने की जरूरत नहीं है।

साफ है कि कोर्ट से बाहर सुलह के किसी भी प्रयास को अभी तक सभी पक्षों की मंजूरी नहीं मिली है और 5 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई भी शुरु हो जाएगी। अब सवाल उठता है कि क्या उससे पहले बातचीत से सुलह का कोई मसौदा तैयार हो पाएगा? अगर कोई सुलह नहीं भी हुई तो क्या इस बार कोर्ट फैसला कर देगा और सभी पक्ष उसे मान लेंगे?


 

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