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आवाज अड्डाः क्या जीएसटी से महंगाई बढ़ने का डर खत्म!

19 मई 2017, 08:56 PM

एक दिन एक टैक्स। कुछ ही समय पहले जो सपना लगता था, अब पूरा होता दिख रहा है। देश भर के वित्त मंत्री धरती के स्वर्ग में जुटे और ठंडे दिमाग से फैसले पर पहुंच गए। ज्यादातर चीजों और सर्विसेज पर जीएसटी के रेट अब तय हो चुके हैं। कुछ गिनेचुने आइटम बचे हैं। पूरी उम्मीद है कि तीन जून की बैठक में उनपर भी फैसला हो जाएगा। लेकिन अब खरीदार, बिकवाल और बीच की पूरी चेन ये समझना चाहती है कि क्या-क्या हो गया और इसका फायदा कैसे और कब होगा।

क्या जीएसटी ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने में कामयाब होगा। क्या ग्राउंड पर इस बात की पूरी तैयारी है कि एक जुलाई से जीएसटी लागू हो जाए। क्या सरकार जीएसटी पर इंडस्ट्री और व्यापारियों की चिंताएं दूर करने में कामयाब रही है। और ये भी एक बड़ा सवाल है कि बड़े फायदे से पहले क्या इकोनॉमी को जीएसटी का झटका लगेगा। जीएसटी पर इस ऐतिहासिक फैसले के बाद इन्हीं सब बातों पर चर्चा करेंगे आज आवाज़ अड्डा में।

आज सर्विसेज पर लगने वाले जीएसटी की दरें तय कर दी गर्ई हैं। ये हैं 5, 12, 18 और 28 फीसदी। कुछ सेवाओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इनमें मुख्य रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं हैं। ट्रांसपोर्ट को जरूरी सेवा मानते हुए उस पर 5 फीसदी की दर तय की गई है। लग्जरी मानी जाने वाली सेवाओं पर 28 फीसदी टैक्स लगाया गया है। इनमें पांच सितारा होटल, सिनेमा, रेस कोर्स आदि हैं। सोने और कुछ अन्य चीजों पर आज भी कोई फैसला नहीं हो सका। अब 3 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक फिर से होगी।

लग्जरी होटलों में जीएसटी ज्यादा लगाया गया है, जबकि छोटे रेस्टोरेंट पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा। 1000 रुपये से कम किराए वाले होटल पर 5 फीसदी का जीएसटी लगाया गया है। 1000-2500 रुपये के किराए वाले होटल पर 12 फीसदी का जीएसटी लगाया गया है। 2500-5000 रुपये के किराए वाले होटल पर 18 फीसदी का जीएसटी लगाया गया है। 5000 रुपये से ज्यादा किराए वाले होटल पर 28 फीसदी का जीएसटी लगाया गया है।

अब आपका मोबाइल बिल भी महंगा होने वाला है। मोबाइल बिल पर 18 फीसदी का जीएसटी लेगेगा, पहले इस पर 15 फीसदी का सर्विस टैक्स लगता था। सिनेमा पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा। लेकिन ट्रांसपोर्ट सेवाओं को सस्ता किया गया है और इन पर अब 5 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा।

चावल, गेहूं, मीट, मछली, चिकन, अंडे, दूध, छाछ, दही, शहद, सब्जियां और फल, आटा, बेसन, ब्रेड, प्रसाद, नमक, गुड़, बिंदी, सिंदूर, स्टांप, स्टांप पेपर, छपी किताबें, अखबार, चूड़ियां, हैंडलूम, लाख, पान का पत्ता, मुरमुरे, पापड़, गर्भनिरोधक, जैविक खाद, लकड़ी का कोयला, हैंडटूल, स्पेसक्राफ्ट, हाथ से बने वाद्य यंत्र, स्लेट, स्लेट पेंसिल पर जीएसटी की कोई दरें नहीं लगाई गई है।

मछली के टुकड़े, क्रीम, मिल्क पाउडर, ब्रांडेड पनीर, फ्रोजेन सब्जियां, पैक्ड कॉफी-चाय, चीनी,  मसाले, रिफाइंड तेल, मिठाई, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट, साबूदाना, केरोसीन, कोयला, दवा, स्टेंट, गिट्टी, लाइफ बोट, माचिस, साइकिल टायर, अखबारी कागज, ईंट, प्लेन, शिप, झाडू़ पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा।

वहीं फ्रोजेन मीट प्रोडक्ट, मक्खन, चीज, घी, मेवे, चर्बी, सॉसेज, जूस, नमकीन, आयुर्वेदिक दवा, इलाज के उपकरण, दंतमंजन, अगरबत्ती, मोमबत्ती, ड्रॉइंग बुक, पिक्चर बुक, छाते, सिलाई मशीन, मोबाइल, पेन, पतंग, जॉमेट्री बॉक्स, बर्तन, चाकू, ट्रैक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, कंघी, पेंसिल पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा। जबकि 18 फीसदी जीएसटी पास्ता, कॉर्नफ्लेक्स, पेस्ट्रीज, केक, सब्जियों का अर्क, जैम, सॉस, सूप, आइसक्रीम, रेडी टू ईट फूड, मिनरल वाटर, टिशू पेपर, रुई, सुई, नोटबुक, स्टील उत्पाद, कैमरा, फिल्म रोल, हेल्मेट, लकड़ी, कार्बन पेपर, टॉयलेट पेपर, स्पीकर, मॉनिटर, गुब्बारे, बटन, ज्यादातर रसायन और धातु पर लगाया गया है।

च्युइंग गम, शीरा, व्हाइट चॉकलेट, चॉकलेट वेफर, पान मसाला, सोडा वाटर, पेंट, कार टायर, मैट्रेस, सूटकेस, पर्स, नकली फूल, डियोड्रेंट, शेविंग क्रीम, आफ्टर शेव, शैंपू, डाई, सनस्क्रीन, वॉलपेपर, सेरामिक टाइल्स, सीमेंट, कांच, वॉटर हीटर, लॉकर, नेम प्लेट, एसी, ट्रक, सनग्लास, घड़ी, लैंप, डिशवाशर, वाश बेसिन, एटीएम, वेंडिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, शेवर, हेयर क्लीपर, कार, मोटरसाइकिल, प्राइवेट जेट, यॉ पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया गया है।

वहीं टैक्स एक्सपर्ट वेद जैन का कहना है कि जिस तरह से सर्विस टैक्स की अलग-अलग दरें लगाई गई हैं उससे पूरी तरह से जीएसटी को लेकर विवाद बढेगा। हांलाकि आज सोने और कुछ अन्य चीजों पर के लिए टैक्स पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब 3 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक फिर से होगी।

सर्विसेज पर लगने वाले जीएसटी को लेकर सीएनबीसी- आवाज से एक्सक्लूसिव बातचीत में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई कम ही होगी ना कि बढ़ेगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आगे कहा कि राजस्व और महंगाई के बीच तालमेल जरूरी है और जीएसटी मौजूदा टैक्सों के औसत से कम होगा। सरकार ऐसा सिस्टम बना रही जो टैक्स कलेक्शन को बढ़ाएगा। अरुण जेटली के अनुसार छोटी कारों पर मौजूदा कर की दर बरकरार होगी लेकिन इससे छोटी कारें महंगी नहीं होंगी। कुछ सोने को लग्जरी आइटम मानते हैं कुछ लोग कम टैक्स चाहते हैं। जीएसटी के लिए 1 जुलाई की डेडलाइन पक्की है।

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